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How Vitamin E Benefits the Skin, Hair, Eyes, Heart -जाने विटामिन ई Kyun zaroori hai

What is Vitamin E?


विटामिन डी की भांति ही विटामिन ई भी वसा में घुलनशील विटामिन है एक एंटीऑक्सीडेंट है। इसका मतलब यह है कि यह शरीर के ऊतक को मुक्त कणों वाले पदार्थों के कारण होने वाली क्षति से बचाता है, जो कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।vitamin E  जिसमें टोकोफेरॉल और टोकोट्रॉयनॉल दोनों निहित हैं।
Impoetance of Vitamin E
यह खून में रेड बल्ड सेल या लाल रक्त कोशिका (Red Blood Cell) को बनाने के काम आता है।  विटामिन ई अद्वितीय गुणों से भरपूर है। आज बाजार में विटामिन ई के रूप में कई सप्लीमेंट्स भी मौजूद हैं। झुर्रियों को रोकने में विटामिन ई लाभकारी है, विटामिन ई केवल कुछ पौधों के खाद्य पदार्थों में पाया जाता है, जिनमें कुछ तेल, नट, अनाज, फल और गेहूं रोगाणु शामिल हैं। यह supplement  रूप में भी उपलब्ध है।



विटामिन ई के फायदे benefits of Vitamin E



  • कोलेस्ट्रॉल यकृत द्वारा प्राकृतिक रूप से होने वाला पदार्थ होता है और शरीर द्वारा आपके कोशिकाओं, नसों और हार्मोन के उचित कार्य के लिए आवश्यक होता है। जब कोलेस्ट्रॉल का स्तर उनके प्राकृतिक अवस्था में होता है, तो वे संतुलित, सामान्य और स्वस्थ होते हैं। । अध्ययनों से पता चला है कि विटामिन ई के कुछ आइसोमर एक सुरक्षात्मक एंटीऑक्सिडेंट के रूप में काम करते हैं
  • विटामिन ई एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो उम्र के बढ़ने के असर को कम करता है। इसे रोजमर्रा के आहार में जरूर शामिल करना चाहिये। विटामिन ई ऑयल आसानी से बाजार में मिल जाता है
  • सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने में विटामिन-ई महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सनबर्न की समस्या या फोटोसेंसेटिव होने जैसी समस्याओं से विटामिन-ई रक्षा करता है
    Benefits of vitamin E
  • विटामिन ई की पर्याप्त मात्रा डायबिटीज के खतरे को कम करने में मदद करती है। यह ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम, इम्यून सिस्टम को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ एलर्जी से बचाव में भी उपयोगी होता है। 
  • विटामिन ई एक्जिमा और सोरायसिस जैसे त्वचा विकारों के लिए एक प्रभावी उपचार साबित होता है।विटामिन ई में मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट सूर्य के हानिकारक प्रभावों के खिलाफ सुरक्षात्मक ढाल के रूप में कार्य करते हैं 
  • विटामिन ई की खुराक सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसे विकारों के प्रभाव से लड़ने में मदद के लिए जानी जाती है 
  • विटामिन ई की  खूबियों के कारण इसे अपने आहार में शामिल किया जा सकता है। विटामिन ई का सेवन करने से दिल सेहतमंद बना रहता है। और स्वस्थ दिल यानी स्वस्थ और लंबा जीवन। इस ऑयल के कारण धमनियों में कोलेस्ट्रॉल भी जमा नहीं होता। धमनियों में बैड कोलेस्ट्रॉल के जमा होने से दिल पर बुरा असर पड़ता है
  •  शरीर में विटामिन-ई की पर्याप्‍त मात्रा मानसिक तनाव और अन्य समस्‍याओं को कम करने में मदद करती 


Vitamin E की कमी से खतरे /deficiency of Vitamin E

Side effect of vitamin E




  • अगरा आपके शरीर में विटामिन ई की कमी है तो इसके कारण शरीर के अंग सही तरीके से काम नहीं करते हैं। विटामिन ई खून में भी पाया जाता है और इसकी कमी से शरीर को ऑक्‍सीजन पर्याप्‍त मात्रा में नहीं मिल पाता और अंग पूरी तरह सक्रिय नहीं रहते हैं। इसके कारण शरीर के अंगों का संतुलन भी बिगड़ सकता है। 
  • अगर आपको रात में कम दिखाई देता है तो इसका कारण विटामिन ई की कमी हो सकता है क्योंकि विटामिन ई की कमी से विटामिन ए भी कम होने लगता है. विटामिन ए नेत्र ज्योति बनाये रखता है, लेकिन Vitamin E शरीर में विटामिन ए का सही लेवल मेन्टेन करने के लिए जरुरी है.
  • एक शोध के अनुसार विटामिन-ई की कमी से मानसिक रोग होने की संभावना बढ़ जाती है
  • शरीर में विटामिन ई की कमी हो जाये तो इसके कारण एनीमिया हो सकता है। विटामिन ई लाल रक्‍त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है जो रक्‍त में ऑक्‍सीजन को पर्याप्‍त रखने में भी मदद करता है। यह शरीर के विभिन्‍न अंगों में भी ऑक्‍सीजन पहुंचाने में मदद करता है। 
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Resource of Vitamin E


इस विटामिन को आप आहारों विभिन्न आहारों  जैसे मूंगफली, अखरोट, बादाम, वनस्पति तेल, कुसुम, गेहूं, सोयाबीन और सूरजमुखी आदि में विटामिन ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. इसके साथ ही सूरजमुखी के बीज और हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक में भी विटामिन ई की मात्रा पाई जाती है.
कीवी, और आम भी विटामिन ई में समृद्ध हैं।


विटामिन  E  अधिकता से होने वाले नुकसान



  • इसकी अधिकता से ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है और मस्तिष्क में गंभीर ब्लीडिंग हो सकती है। 
  • इस विटामिन का अधिक सेवन आंखों की रोशनी पर भी असर डालता है।
  • गर्भवती महिला के शरीर में विटामिन ई की अधिक मात्रा होने से बच्चे में बर्थ डिफेक्ट भी हो सकते हैं। 


Vitamin E की आवश्यक मात्रा कितनी होनी चाहिए

  • नवजात शिशु से छह माह : 4 मिलिग्राम
  • नवजात शिशु 7 से 12 माह : 5 मिलिग्राम
  • बच्चे 1 से 3 वर्ष : 6 मिलिग्राम
  • बच्चे 4 से 8 वर्ष : 7 मिलिग्राम
  • बच्चे 9 से 13 वर्ष : 11 मिलिग्राम
  • 14 वर्ष और उससे बडे : 15 मिलिग्राम
  • स्तनपान कराने वाली महिलाएं : 17 मिलिग्राम


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