AdSense

Click Here

10 Best yoga Asanas for #Fitness and #Weight loss -

                 योग अपनाये मोटापा घटाये

योग शरीर और मन को आपस में जोड़ने का तरीका हैं जो न सिर्फ हमें मानसिक रूप से बल्कि शारीरिक रूप से फिट रखने में भी मदद करता है योग आपको शारीरिक व मानसिक दोनों तरह से फिट रखता है। योग करने से शरीर मजबूत होता है, मांसपेशियां मजबूत होती है और वजन भी कम होता है।आज दुनिया मे लाखों लोग मोटापे का शिकार है जिससे उन्हें कई बीमारियों का सामना करना पड़ रहा हैं osstioorthrites ,heart disease, diabetes, etc कई ऐसी बीमारियाँ होती हैं। इसलिए हमारे वजन कै संतुलित होना बहुत जरूरी हैं weight loss करने मे योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं ।

योग सदियों से चला आ रहा है, सिर्फ भारत ही नही पूरे विश्व मे योग प्रचलित अभ्यास है. योग केवल शारीरक रूप से ही नही हमें मानसिक रूप से भी  भी स्वस्थ रखता हैं योग  के हज़ारो फायदे है तभी दुनिया भर के हज़ारो करोड़ लोग इसे नियमित रूप से करते आ रहे है।यह एक ऐसा एरोबिक व्ययाम है जो यदि मध्य गति के साथ किया जाए तो मोटापा घटाने में अत्याधिक लाभदायक साबित हो सकता है|यदि आप सच में अधिक मोटापा घटाने के चाहते हैं तो किसी भी योग प्रशिक्षक की निगरानी में लंबे तक योग का अभ्यास करे।  


दोस्तों  वजन घटाने के हज़ारों तरीके बताये जाते हैं, पर इन सब तरीकों में जो तरीका आपको बिना side-effects के एक long-term solution देता है, वो है योग। योगा के जरिये किसी भी बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है चाहे वह मोटापा ही क्यों न हो, बस जरुरत हैं अपने शरीर के लिए समय निकालने की ।

इसीलिए आज हम आपके साथ वजन घटाने के लिए कारगर 15 योगासनों को share कर रहे हैं-

#1  कपालभाती प्राणायाम( Kapalbhati Pranayama )

जब आप कपालभाति प्राणायाम करते हैं तो आपके शरीर से विषैले तत्त्व बाहर जाती साँस के साथ निकल जाते हैं। कपालभाति प्राणायाम के निरंतर अभ्यास से शरीर के सभी अंग विषैले तत्व से मुक्त हो जाते हैं। Kapalbhati कपालभाति प्राणायाम को नियमित करने वाले व्यक्तियों के शरीर से उसकी मानसिक एवं शारीरिक परेशानियां दूर हो जाती है। इसे व्यक्ति प्रत्येक बार सांस छोड़ते समय आसानी से महसूस भी कर सकता है। कपालभाति करना बहुत ही आसान होता है और प्रत्येक व्यक्ति इसे बैठकर कर सकता है.


विधि -


  • पनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए, अपने पैरों को मोड़कर फर्श पर एकदम सीधे होकर बैठ जाएं। अपनी पीठ को बिल्कुल सीधे रखें और अपनी आंखें बंद कर लें।
  • अब अपनी दाएं हाथ की हथेली को दांये घुटने पर और बाएं हाथ की हथेली को बांए घुटने पर आराम से रखें।
  •  गहरी सांस खींचे और फिर पूरे दबाव के साथ सांसों को छोड़ें। दबाव सिर्फ इतना ही दें कि सांस छोड़ते समय आपका पेट भी अंदर की तरफ चला जाए।
  • जब आप सांस छोड़ने लगते हैं तो अपने सांसों की आवाज को सुनते हुए यह सोचें कि आपके शरीर की सारी बीमारियां नाक के रास्ते बाहर निकल रही हैं।
  • जब सांस खींच रहे हैं तो इसपर कोई दबाव न दें। सांस खींचने में आपको जोर भी नहीं लगाना है, बस हर बार सामान्य तरीके से ही सांस लें।
  • पांच मिनट तक लगातार इस प्रक्रिया को दोहराएं और फिर थोड़ी देर आराम लें। इस प्राणायाम को आप पंद्रह से तीस मिनट तक भी कर सकते हैं।

फायदे 
  • पेट की चरबी घटाने के लिए यह एक रामबाण उपाय है। इस आसन को करने से शरीर का वज़न कम होता है। इस गुणकारी आसन के प्रभाव से मोटापा घटाने में तो मदद मिलती ही है.
  •  पेट की मासपेशियों को सक्रिय करता है जो कि dibetes  के रोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है।
  • ब्लड सर्कुलेशन  को ठीक करता करके  चेहरे पर चमक बढ़ाता है।
  • digestive system को  ठीक करता है और पोषक तत्वों का शरीर में संचरण करता है।जिससे 
  • आपकी पेट कि चर्भी फलस्वरूप अपने-आप काम हो जाती है।
  • मस्तिष्क और तांत्रिक तंत्र को ऊर्जान्वित करता है ।
  • मन को शांत करता है।
सावधानियाँ -
  • कपालभाती आसन खाली पेट करना चाहिए और इसे करने के बाद आधे घंटे तक कुछ भी ना खाएं।अगर आप हृदय रोग के मरीज हैं तो कपालभाति प्राणायाम करते समय सांसें बिल्कुल हल्के से छोड़ें या फिर आप यह प्राणायाम ना करें।
  • यदि आप हर्निया, मिर्गी, स्लिप डिस्क, कमर दर्द, अथवा स्टेंट के मरीज़ हैं तो यह प्राणायाम न करें। यदि आपकी कुछ समय पूर्व पेट की सर्जरी हुई है तब भी यह प्राणायाम न करें।
  • महिलाओं को यह प्राणायाम गर्भावस्था के दौरान अथवा उसके तुरंत बाद नही करना चाहिए। मासिक धर्म के दौरान भी यह प्राणायाम नही करना चाहिए।
  • हाइपरटेंशन के मरीजों को यह प्राणायाम किसी योग प्रशिक्षण के नेतृत्व में ही करना चाहिए।

#2  अनुलोम विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom Pranayama)


अनुलोम का अर्थ होता है सीधा और विलोम का अर्थ है उल्टा। यहां पर सीधा का अर्थ है नासिका या नाक का दाहिना छिद्र और उल्टा का अर्थ है-नाक का बायां छिद्र। अर्थात अनुलोम-विलोम प्राणायाम में नाक के दाएं छिद्र से सांस खींचते हैं, तो बायीं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते है। इसी तरह यदि नाक के बाएं छिद्र से सांस खींचते है, तो नाक के दाहिने छिद्र से सांस को बाहर निकालते है.हर दिन बस कुछ ही मिनटों के लिए यह अभ्यास मन को स्थिर, खुश और शांत रखने में मदद करता है। मानव शरीर में सब से ज़्यादा चरबी, पेट, कमर और जाँघों के आसपास जमा होती है। इस आसन के प्रभाव से पेट अंदर हो जाता है। पेट की चरबी भी घट जाती है। 

विधि -

  • अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा और कंधों को ढीला छोडकर आराम से बैठे। एक कोमल मुस्कान अपने चेहरे पर रखें।दाहिने हाथ के अंगूठे से नाक  के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नाक  के बाएं छिद्र से 4 तक की गिनती में सांस को भरे 
  • और फिर बायीं नाक के छिद्र  को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें। तत्पश्चात दाये नाक के छिद्र  से अंगूठे को हटा दें और दायीं नासिका से सांस को बाहर निकालें।
  • - अब दायीं नासिका से ही सांस
  • अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा और कंधों को ढीला छोडकर आराम से बैठे। एक कोमल मुस्कान अपने चेहरे पर रखें।दाहिने हाथ के अंगूठे से नाक  के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नाक  के बाएं छिद्र से 4 तक की गिनती में सांस को भरे 
  • और फिर बायीं नाक के छिद्र  को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें। तत्पश्चात दाये नाक के छिद्र  से अंगूठे को हटा दें और दायीं नासिका से सांस को बाहर निकालें।
  • - अब दायीं नासिका से ही
  •  को 8 की गिनती तक भरे और दायीं नाक को बंद करके बायीं नासिका खोलकर सांस को 8 की गिनती में बाहर निकालें।
  • - इस प्राणायाम को 10 से 15 मिनट तक कर सकते है।

फायदे -

  • मन को शांत और केंद्रित करने के लिए यह एक बहुत अच्छी क्रिया है|
  • नाड़ियों की शुद्धि करता है और उनको स्थिर करता है, जिससे हमारे शरीर में प्राण ऊर्जा का प्रवाह हो।
  • शरीर का तापमान बनाए रखता है।श्वसन प्रणाली व रक्त-प्रवाह तंत्र से सम्बंधित समस्याओं से मुक्ति देता है|
  • मन और शरीर में संचित तनाव को प्रभावी ढंग से दूर करके आराम देने में मदद करता है।
  •  फेफड़े शक्तिशाली होते है
  • सर्दी, जुकाम व दमा की शिकायतों से काफी हद तक बचाव होता है।
  • हृदय बलवान होता है।
  • अनुलोम  विलोम  करने से कोई भी एलर्जी जड़ से ख़त्म हो सकती हैं 

सावधानियाँ -


  •   अनुलोम विलोम सुबह खाली पेट करे या शाम को सूर्यास्त के बाद करे 
  • खाना खाने के कम से कम तीन घंटे बाद करे खाने के तुरंत बाद कभी नहीं करना चाहिए। 



#3 सेतुबंध आसन(Setubandh Asana)

सेतुबंधासन जिसे हम ब्रिज पोज के नाम से जानते हैं बहुत ही प्रभावी आसन है। स आसन में  शरीर सेतु (Bridge) के समान आकार में हो जाता है, इसलिए इसे सेतुबंधासन कहा जाता है|इसे संस्कृत के शब्द सेतु से लिया गया है, जिसका अर्थ है पुल।
पीठ को मजबूत करने के लिए यह आसन उत्कृष्ट है। सेतुबंधासन पेट की मांसपेशियों को फैलता है क्योंकि पेट में वसा पिघलने के लिए एक उत्कृष्ट मुद्रा है।


विधि -

  •  अपने पीठ के बल लेट जाएँ|
  • अपने घुटनो को मोड़ लें| घुटनो और पैरों को एक सीध में रखते हुए, दोनों पैरों को एक दुसरे से 10  से 12  इंच दूर रखते हुए फैला ले|
  • हाथों को शरीर के साथ रख ले| हथेलियाँ ज़मीन पर रहे|
  • साँस अंदर भरते हुए  धीरे धीरे अपनी पीठ के निचले, मध्य और फिर सबसे ऊपरी हिस्से को ज़मीन से उठाएँ|धीरे से अपने कन्धों को अंदर की ओर लें| बिना ठोड़ी को हिलाये अपनी छाती को अपनी ठोड़ी के साथ लगाएँ और अपने कन्धों, हाथों व पैरों को अपने वज़न का सहारा दें| शरीर के निचले हिस्से को इस दौरान स्थिर रखें| 
  • चाहें तो इस दौरान आप अपने हाथों को ज़मीन पर दबाते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को उठा सकते हैं| अपनी कमर को अपने हाथों द्वारा सहारा भी दे सकते हैं|
  • आसन को 1-2 मिनट बनाएँ रखें और साँस छोड़ते हुए आसन से बहार आ जाएँ|

फ़ायदे -

  • कमर के लिए बहुत फायदेमंद कसरत है। 
  • पीठ की मासपेशियों को मज़बूत बनाता हैं|
  • पीठ की मासपेशियों को आराम देता हैं|
  • . रीढ़ और जोड़ों को लचीलापन बनाने का काम सेतुबंधासन करता है।
  •  फेफड़ों और थायराइड की समस्या में यह आसन बहुत ही लाभकारी है।
  • मासिक धर्म व रजोनिवृति के दौरान मदद करता है|
  • उच्च रक्त चाप, अस्थमा, ऑस्टियोपोरोसिस व साइनस के लिए लाभदायक|
  • सेतुबंधासन स्लिप डिस्क या ऊपरी / निचले पीठ दर्द जैसी स्थितियों में सहायक होता है।
  • इस आसन के नियमित अभ्यास से रक्त परिसंचरण में भी सुधार होता है।

सावधानियाँ -

  • यदि आपको कमर व गर्दन से संबधित कुछ तकलीफ है तो यह आसन न करें|
  •  यह आसन तब करे जब आपकी  पेट बिल्कुल खाली हो।
  • इस तरह के आसन को   गर्भवती  महिलाएं  न  करे । यदि करना है तो विशेषज्ञों की सलाह लें।
  •  जो लोग गर्दन की चोट से ग्रस्त हैं उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।

#4 नौकासन योग (Naukasan Yogasana in Hindi)

इस आसन को नौकासन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका आकार नाव की तरह का होता है। इसको नावासन के नाम से भी पुकारा जाता है। इसके बहुत सारे फायदे  हैं। यह पेट की चर्बी को कम करने के लिए बहुत ही प्रवभाशाली योगाभ्यास है। यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और साथ ही साथ सिर से लेकर पैर की अंगुली तक फायदा पहुँचाता है।

विधि - 


  • पीठ के बल लेट जाएँ और दोनों पैरों को एक साथ जोड़ लें| दोनों हाथों को शरीर के साथ लगा ले|
  • एक लंबी गहरी साँस लें और साँस छोड़ते हुए हाथों को पैरों कि तरफ खींचे और अपने पैरों एवं छाती को उठाएँ|
  • आपकी आँखें, हाथों कि उंगलियाँ व पैरों कि उंगलियाँ एक सीध में होनी चाहिए|
  • पेट की मासपेशियों के सिकुड़ने के कारण नाभी में हो रहे खींचाव को महसूस करें|
  • लंबी गहरी साँसे लेते रहे और आसन को बनाये रखें|
  • साँस छोड़ते हुए, धीरे से ज़मीन पर आ जाएँ और विश्राम करें|
  • एक दूसरा  तरीका नौकासन का है जिसमें आप अपने सिर और पैर को सांस लेते हुए 45 डिग्री पर उठाते हैं एवं शरीर को V आकर का बनाते हैं। इसको एडवांस्ड नौकासन में रखा जाता है।
  • अपने हिसाब से इस स्थिति को धारण करें।
  • फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे जमीन की ओर आयें।
  • नौकासन की यह विधि वजन को कम करने के लिए बहुत ही प्रभावी है।

फायदे -
  • नौकासन पेट की चर्बी को कम करने के लिए बहुत ही  बढ़िया  आसन है अगर इसका नियमित रूप से अभ्यास किया जाये तो बहुत जल्द आप पेट की चर्बी से छुटकारा पा सकते हैं।
  • कमर व पेट कि मासपेशियों को मज़बूत बनाता है|
  • हाथों व पैरों को मज़बूत बनाता है और सही आकार देता है|
  • हर्निया के रोगियों के लिए लाभकारी|
  • पेट और नाभी के आसपास के भाग को सुडौल बनाने के लिए यह एक गुणकारी आसन है। इस आसन के प्रभाव से हमारी पाचन प्रणाली भी मज़बूत होती है
  •  नियमित रूप से इस आसन को करने से किडनी स्वस्थ रहता है और साथ ही साथ शरीर का यह अंग बेहतर तरीके से काम करता है।
  •  यह आसन कब्ज को कम करने में बहुत मददगार है क्योंकि एंजाइम के स्राव में बड़ी भूमिका निभाता है।
  •  नौकाआसन करने से हमारी शरीर की छोटी आंत और बड़ी आंत को व्यायाम मिलता है। इस आसन को नित्य करने से आंतों से जुड़ी बीमारियाँ होने का खतरा नहीं रहेता है.

सावधानियाँ -

  • यदि आपको low blood pressure , अधिक सरदर्द, मीग्रैन अथवा कभी भी पीठ से सम्बंधित कोई भी समस्या हुई हो तो यह आसन न करें|

  • अस्थमा व दिल के मरीज़ यह आसन न करें|
  • महिलाएँ यह आसन गर्भावस्था व मासिक धर्म के पहले दो दिन के दौरान न करें
  • कमर से जुड़ी किसी भी प्रकार की तकलीफ से पीड़ित व्यक्ति, इस आसन का प्रयोग डॉक्टर की सलाह के बिना बिलकुल ना करें।
  •  पेट से जुड़ी गंभीर बीमारीयों के रोगी को इस आसन का प्रयोग किसी चिकित्सक की सलाह अनुसार ही करना चाहिए।
  •  यह आसन गर्भवती महिलाओं के लिए बिलकुल वर्जित है।
#5  वकासन (Bakasana)
वकासन एक संतुलन एवं एडवांस्ड आसन है। इसलिए इसको करना थोड़ा कठिन हैं।वकासन संस्कृत शब्द वक से बना है जिसका अर्थ होता है बगुला। इस आसन में शरीर की अंतिम मुद्रा बगुले के समान लगती है, इसीलिए यह नाम  दिया गया है।

विधि 

  • हाथों को पैरों के सामने जमीन पर रखें।
  • बांहों को दबाएं तथा घुटने मुड़े रखते हुए ही पैरों को जमीन से ऊपर उठा लें।
  • हाथों को जमीन पर रखते हुए शरीर को जमीन से ऊपर लें जाने  का प्रयास करे 
  • यदि आप सही तरीके से संतुलन करने में सक्षम नहीं हैं, तो अपने हाथों के नीचे एक फोल्ड कंबल रखने का प्रयास करें ताकि आपके शरीर को आराम  मिल सके।
  • आपके प्रत्येक हाथों के बीच एक स्वीकार्य दूरी होना चाहिए, इसलिए आपके शरीर को अपने हाथों में संतुलित करना आपके लिए आसान हो जाता है।
  • धीरे-धीरे धीरे-धीरे रिलीज होने के बाद, 15-20 सेकंड के लिए इस स्थिति में स्थिर रहें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में तीन बार दोहराएं।

फायदे -

  • : यह शरीर को संतुलित करने में मदद एवं इसको विकसित करता है।
  • यह छाती को मजबूत बनाने और फेफड़े के लिए बेहतरीन योगाभ्यास है।
  • ह कंधे के विकारों को दूर करते हुए कंधे को मजबूत बनाने में मदद करता है।
  •  यह हृदय गति को भी सुचारू बनाता है।
  • इसे नियमित करने से पेट की जमी चर्बी घटती हैं और शरीर सुडोल और सुन्दर बनता है|
  • पेट से जुड़े सभी रोगों में लाभकारी हैं|
  • इससे शरीर के समस्त अंगों में खिंचाव उत्पन्न होने की वजह से शरीर में कभी भी अकडन नहीं होती हैं और शरीर लचीला बना रहता है
  • बकासन के निरन्तर अभ्यास से आपके चेहरे में चमक आती हैं|

सावधानियाँ -
  • आसन को जबरदस्ती करने का प्रयास न करें।
  • हृदय रोग से ग्रस्त व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • कंधे मे  ज़्यदा दर्द होने पर इस
  • इस आसन को करने के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
  •  हाथों  में कोई गंभीर शिकायत हो तो वह यह आसक कतई न करें।
  • गर्भवती महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिये।
Click here

#6 त्रिकोणासना (Trikonasana )

त्रिकोणासना करते समाये हमारी body त्रिकोण के सामान हो जाता इसलिए इसे त्रिकोणासन कहते हैं. मोटापे से परेशान लगी के लिये यह सबसे उत्तम और आसान है इसका नियमित अभ्यास करने से पेट ,कमर जांघ और कूल्हों की चर्बी घटाने में बहुत मददगार हैं।

विधि -

  • सीधे खड़े हो जाएँ। अपने पैरों के बीच सुविधाजनक दूरी बना लें। 
  • अपने दाहिने पंजे को 90  डिग्री तथा बाएँ पंजे को 15 डिग्री तक घुमाएँ।
  • अपनी दाहिनी एड़ी के केंद्र को अपने बाएँ पैर से बन रहे घुमाव के केंद्र कि सीध में लेकर आएँ।
  • सुनिश्चित करें की आपके पंजे जमीन को दबा रहे हों और शरीर का भार दोनों पैरों पर समान रूप से हो।
  • एक गहरी श्वास अन्दर की ओर लें, श्वास बाहर की ओर छोड़ते हुए अपने शरीर को दाहिने तरफ मोड़ें, कूल्हों से नीचे की तरफ जाएँ, कमर को सीधा रखते हुए अपने बाएँ हाथ को ऊपर हवा में उठाएँ और दाहिने हाथ को नीचे जमीन की तरफ ले जाएँ। इस प्रकार अपने दोनों हाथों को एक सीध में रखें।
  • अपने दाहिने हाथ को एड़ी या जमीन पर बाहर की तरफ रखें अथवा अपनी कमर को बिना मोड़े हुए जहाँ भी संभव हो रख सकते हैं। अपने बाएँ हाथ को छत की ओर खींचे और कंधो की सीध में ले आएँ । अपने सिर को बीच में रखे या बाहिनी ओर मोड़ लें, आँखों की दृष्टि को बहिनी हथेली की ओर केंद्रित करें।
  • ध्यान रखें की आपका शरीर किनारे की तरफ से मुड़ा हुआ हो। शरीर आगे या पीछे की ओर झुका न हो। नितम्ब तथा वक्ष पूरी तरह से खुले रहें।
  • शरीर में अधिकतम खिंचाव बनाए रखते हुए स्थिर रहें। गहरी श्वासें लेते रहें। बाहर जाती हुई प्रत्येक श्वास के साथ शरीर को विश्राम दें। अपने शरीर एवं श्वास के साथ मनःस्थित रहें।
  • जब भी श्वास लें, ऊपर की ओर उठें, अपने हाथों को नीचे की तरफ लाएँ और पैरों को सीधा करें।
  • यही प्रक्रिया अपनी दूसरी तरफ से भी करें।
फायदे -
  • यह आसन पैरों, घुटनों, एड़ियों, हाथों और वक्ष को मजबूत बनाता है।
  • यह आसन नितम्बों, कूल्हों, जंघा की मांसपेशियों, कन्धों, वक्ष तथा रीढ़ की हड्डी में और ज्यादा खुलाव व खिंचाव उत्पन्न करता है।
  • यह आसन शारीरिक व मानसिक तारतम्यता को बढ़ता है।
  • पाचन को बेहतर करने में सहायता करता है 
  • तनाव, चिंता, पीठ के दर्द और सायटिका के कष्टों को दूर करता है।

सावधानियाँ -

  • यदि आपको माइग्रेन, डायरिया, निम्न या उच्चरक्तचाप, गर्दन या पीठ पर चोट लगी हो तो इस आसन को न करें 

#7   वज्रासन ( Vajrasna )

वज्र का अर्थ है मजबूत अत: वज्रासन आसन के द्वारा शरीर के अंगो को शक्तिशाली बनाया जाता है | इस आसन के द्वारा सम्पूर्ण पैर मजबूत और ताकतवर बनता है | यह पाचन तंत्र को सही करता है और गैस अपच कब्ज जैसी बीमारियों को दूर करता है |
विधि -
  • घुटनों के बल खड़े हो जाएँ, और पुट्ठों को एड़ियों पर रखते हुए बैठे, पंजो को जमीन पर रखें पैरों की उँगलियाँ बाहर की ओर, पैरों के अंगूठे एक दूसरे को छूते हुए।
  • दोनों एड़ियों के बीच बनी जगह में बैठे।
  • सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी को एक सीधी रेखा में रखे, हथेलियां जांघों पर, आकाश की ओर खुली हुई।
  • सांस छोड़े और पैरों को सीधा कर लें।
  • सांस छोड़े और पैरों को सीधा कर लें।



फायदे -


  • महिलायो के मासिक धर्म में सुधार होता है |
  • आप अपनी जांघो और पैरो को मजबूत बना सकते हैं। 
  • भोजन के पश्चात् वज्रासन में बैठने से भोजन का पाचन अच्छा होता है।
  • अधिक वायु दोष या दर्द में आराम मिलता है।
  • पैर और जांघों की नसे मजबूत होती हैं।
  • घुटने और एड़ी के जोड़ लचीले होते हैं गठिया वात रोग की सम्भावना काम होती है।
  • वज्रासन में रीढ़ कम प्रयास से सीधी रहती है। इस आसान में प्राणायाम करना लाभकारी है और ध्यान के लिए तैयार करता है।
  • कब्ज ठीक होता है भूख लगती है |
  • मन एकाग्र होता है और रीढ़ की हड्डी मजबूत होवजन कम किया जा सकता है | 
  • खून का बहाव ठीक होता है और पीलिया जैसी बीमारी को भी ठीक करता है |
  • पुरषों की वीर्यशक्ति बढती है |
 सावधानियाँ -
  • जिनके पैर की एड़ी में दर्द हो वो इसे ना करे |
  • जोड़ो के दर्द मारे मरीज पहले किसी योग शिक्षक से सलाह ले ले |
  • जिन्हे चलने फिरने में दिक्कत है वे इस आसन को बहुत सावधानी के साथ करें।

#8 हलासन (Halasana )

इस आसन में शरीर का आकार हल जैसा बनता है। इससे इसे हलासन कहते हैं। हलासन हमारे शरीर को लचीला बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। इससे हमारी रीढ़ सदा जवान बनी रहती है।अंग्रेजी में इससे plow pose कहा जाता है। यह चर्बी घटाने के साथ साथ मधुमेह के रोगियों में इंसुलिन का livel  बढ़ाने में मदद करता है। 



    विधि -

    • पीठ के बल लेट जाएं और हाथों को जांघों के निकट टिका लें।
    • अब आप धीरे-धीरे अपने पांवों को मोड़े बगैर पहले 30 डिग्री पर, फिर 60 डिग्री पर और उसके बाद 90 डिग्री पर उठाएं।
    • सांस छोड़ते हुए पैरों को पीठ उठाते हुए सिर के पीछे लेकर जाएं और पैरों की अँगुलियों को जमीन से स्पर्श करायें।
    • अब योग मुद्रा हलासन का रूप ले चूका है।
    • धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े।
    • जहाँ तक संभव हो सके इस आसन को धारण करें।
    • फिर धीरे धीरे मूल अवस्था में आएं।
    • यह एक चक्र हुआ।
    • इस तरह से आप 3 से 5 चक्र कर सकते हैं।

    फायदे -

    • रीढ़ में कठोरता होना वृद्धावस्था की निशानी है। हलासन से रीढ़ लचीली बनती है। 
    • मेरुदंड संबंधी ना‍ड़ियों के स्वास्थ्य की रक्षा होकर वृद्धावस्था के लक्षण जल्दी नहीं आते।
    •  हलासन के नियमित अभ्यास से अजीर्ण, कब्ज, अर्श, थायराइड का अल्प विकास, अंगविकार, असमय वृद्धत्व, दमा, कफ, रक्तविकार आदि दूर होते हैं। 
    • सिरदर्द दूर होता है।
    •  नाड़ीतंत्र शुद्ध बनता है। शरीर बलवान और तेजस्वी बनता है।
    •  लीवर और प्लीहा बढ़ गए हो तो हलासन से सामान्यावस्था में आ जाते हैं। 
    • अपानवायु का उत्थानन होकर उदान रूपी अग्नि का योग होने से कुंडल‍िनी उर्ध्वगामी बनती है। विशुद्धचक्र सक्रिय होता है।
    सावधानियाँ -
    • रीढ़ संबंधी गंभीर रोग अथवा गले में कोई गंभीर रोग होने की स्थिति में यह आसन न करें। 
    • आसन करते वक्त ध्यान रहे कि पैर तने हुए तथा घुटने सीधे रहें।
    • यह आसन उनको नहीं करनी चाहिए जिनको सर्वाइकल स्पॉण्डिलाइटिस हो।
    • रीढ़ में अकड़न होने पर इसको करने से बचें।
    • उच्च रक्तचाप में इस आसन को नहीं करना चाहिए।
    • कमर में दर्द होने पर इस आसन को कतिय न करें।
    • चक्कर आने पर इस आसन को न करें।
    • गर्भवस्था एवं menopause में इस योग को करने से बचें।
    • ह्रदय रोग से पीड़ित व्यक्ति इसे न करें।
    • हलासन के सबसे अधिक लाभ तब मिलते हैं जब हलासन के फौरन बाद भुजंगासन किया किया जाए।
    #9   सर्वागासना (Sarvangasana)
     सर्वांगासन सस्कृत के शब्द सरंगसाना से लिया गया है, जो दो शब्दों (सर्व+अंग) से मिलकर बना है। जिसका सही मतलब है शरीर के सभी अंगो को खड़ा करना। इस योग मुद्रा में सभी अंगो को शामिल किया जाता है इसलिए इसे सर्वांगासन योग मुद्रा के रूप में जाना जाता है।अंग्रेजी भाषा में इस आसन को Shoulder Stand Pose के नाम से जाना जाता है। कई योग ज्ञानी सर्वांग आसन को दूसरे अन्य योग आसनों का “जनेता” कह कर भी पुकारते हैं।

    विधि -

    • इस आसन का अभ्यास करने के लिए सर्वप्रथम चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं।
    • अब अन्दर की और धीरे-धीरे सांस ले और पैरों को ऊपर की और उठाएं।
    • इस क्रिया में पहले पैरों को ऊपर उठाएं, फिर कमर को, इसके पश्चात अपने छाती तक के भाग को ऊपर की और उठाये|
    • इस क्रिया को करते वक्त पैरों को सीधा रखें, अपने घुटनों को मौड़े नहीं|
    • आप अपनी कमर को सहारा देने के लिए अपने दोनों हाथों को कोहनी से मोड़कर कमर पर लगाकर इसे सहारा दे|
    • इस आसन में शरीर का पूरा भार कंधों पर रहता है| इसलिए इस स्तिथि में आपके कंधे से कोहनी तक के भाग को जमीन से सटाकर रखें|
    • जब आप ऐसा करेंगे तब आपकी थोड़ी आपकी छाती से सटी हुयी होगी|
    • अब पैरों को तान कर ऊपर की और खिचे, तथा शरीर को स्थिर करते हुए कुछ सेकंड्स इसी स्तिथि में बने रहे|
    • इस अवस्था में आपको सामान्य रूप से सांस लेना और छोड़ना है|
    • जब आपको इसकी अच्छी प्रैक्टिस हो जाये तक आसन के अभ्यास का समय बढ़ाकर आप 3 मिनट तक का कर सकते है|
    • अब सामान्य अवस्था में आने के लिए शरीर को ढीला छोड़ दे, और घुटनों को मोड़कर आराम से सामान्य अवस्था में आये|
    • इसके बाद 20 सैकेंड तक आराम करें।
    • इस क्रिया को 3 से 4 बार कर

    फायदे -

    • सर्वांग आसन प्रतिदिन सुबह में करने से सभी तरह के मनोविकार दूर हो जाते हैं।
    • मोटापे से त्रस्त व्यक्ति सर्वांग आसन कर के अपना अतिरिक्त वज़न कम(Weight Loss) कर सकता है।
    • सर्वांग आसन करने से कब्ज़ की समस्या दूर होती है। तथा अन्य सभी प्रकार की पाचन समस्या दूर हो जाती हैं। इस आसन को करने से सिरदर्द की समस्या दूर होती है।
    • जननांग अंग नियंत्रित और सही होते है।
    • जिस किसी को कब्ज की शिकायत हो उसे इससे काफी फायदा होता है।
    • बबासीर की परेशानी दूर होती है।
    • कान, नाक और गले में हो रही समस्याओं के लिए उपयोगी है।
    • रक्त परिसंचरण तंत्र, पाचन तंत्र और स्वशन प्रणाली को सही करता है।
    • थायरॉयड ग्रंथि को ताज़ा करें।
    • यौन विकारों का सफल इलाज।
    • शीघ्रपतन की परेशानी को दूर करता है।
    • अस्थमा, मधुमेह, यकृत विकार और आंत्र विकारों में लाभकारी।
    • चेहरे में खाल और झुर्रियों के सिकुड़ते नियंत्रण करता है।
    सावधानियाँ -
    • उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति इस योग को करने से बचें।
    • गर्दन में दर्द की समस्या रहती हों, उनके लिए सर्वांगासन हानिकारक हो सकता है।
    • कमर में दर्द, घुटनो में दर्द वाले इस योग से दूर रहें।
    • मासिक धर्म और गर्भवस्था में इस योग को नहीं करें।
    • उच्च रक्तचाप (Hypertension) की समस्या वाले व्यक्ति को सर्वांग आसन हानिकारक हो सकता है।
    • हृदय रोग (Heart Disease) की समस्या वाले व्यक्ति को भी सर्वांग आसन नुकसानदेह हो सकता है।
    • कमर दर्द की समस्या वाले व्यक्ति को भी सर्वांग आसन नहीं करना चाहिए।
    • घेंघा रोग (Goiter Disease) के रोगी को भी यह आसन हानिकारक होता है।
    • अगर आपको चक्कर आते हो तो इसे नहीं करें।
    • अपनी छमता के अनुसार ही इस योग को करें। धीरे धीरे आप आगे ज्यादा देर इसे कर सकते हैं।
    #10 सूर्य नमस्कार -पूरा लेख पढ़े
    Click here. 
    Surya Namaskar (sun salutation)Benefits of Surya Namshkaar stey by step


    बताये जा रहे योगासनों का video you tube पर जरूर देखे हो सके तो इन्हें किसी योग शिक्षक के देखरेख मे करें 
    Friends .यहाँ दी गई जानकारी आपको कैसी लगी ...अपने विचारों और सुझावों को comment के जरीये comment box मे जरूर बताये ........यदि आपको यहाँ दी गई जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने परिवार और दोस्तों के share करीये  और आगे ऐसे ही जानकारी  के लिए  subscribe करीये www.carefast.in 
    Thank you for visiting here


              Previous
              Next Post »