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Surya Namaskar (sun salutation)Benefits of Surya Namshkaar (stey by step)

 सूर्य नमस्कार – एक  अभ्यास

सूर्य नमस्कार सबसे प्रसिद्ध और व्यापक रूप से अभ्यास किए जाने वाले  योग आसनों में से एक है।.  यदि आपके पास समय की कमी है, और आप Fit  रहने का कोई नुस्ख़ा ढूँढ रहे हैं, तो सूर्य नमस्कार उसका सबसे अच्छा विकल्प है। 'सूर्य नमस्कार' का शाब्दिक अर्थ सूर्य को अर्पण या नमस्कार करना है। यह योग आसन शरीर को सही आकार देने और मन को शांत व स्वस्थ रखता हैं । बारह विभिन्न योगों की एक श्रृंखला होती है जो शरीर के विभिन्न हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करती है।विशेषज्ञों के अनुसार सूर्य नमस्कार हमारे शरीर को सक्रिय रखने का एक शानदार तरीका है क्योंकि यह हमारे शरीर के सभी संभावित क्षेत्रों की एक्सरसाइज करने में मदद करता है। यह शरीर को लचीला बनाने और weight loss करने मे मददगार हैं।।सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से शरीर में Blood circulation बेहतर होता है, स्वास्थ्य बना रहता है और शरीर रोगमुक्त रहता है| सूर्य नमस्कार से हृदय, यकृत, आँत, पेट, छाती, गला, पैर शरीर के सभी अंगो के लिए बहुत से लाभ हैं।यह हमारे लिगामेंट्स सहित हमारे skeletal system को मजबूत करने में मदद करता है और तनाव और चिंता को कम करने में भी सहायता करता है।सूर्य नमस्कार' स्त्री, पुरुष, बाल, युवा तथा वृद्धों के लिए भी उपयोगी बताया गया है।

सूर्य नमस्कार करने का सही समय  - सूर्य नमस्कार के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि यह मन व शरीर को ऊर्जान्वित कर तरो ताज़ा कर देता है और दिनभर के कामो के लिए तैयार कर देता है| यदि यह दोपहर में किया जाता है तो यह शरीर को तत्काल ऊर्जा से भर देता है, वहीं शाम को करने पर तनाव को कम करने में मदद करता है | यदि सूर्य नमस्कार तेज गति के साथ किया जाए तो बहुत अच्छा व्यायाम साबित हो सकता है।

सूर्य नमस्कार के 12आसन और करने की विधि  -  12. Steps of Surya Namskaar
#Step1  प्राणामासनः pranamasana


दोनों हाथों को जोड़कर सीधे खड़े हों , हाथों को जोड़कर उसे हृदय के पास रखे पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें। अपनी छाती फुलाएँ और कंधे ढीले रखें।
श्वास लेते हुए दोनों हाथ बगल से ऊपर उठाएँ और श्वास छोड़ते हुए हथेलियों को जोड़ते हुए छाती के सामने प्रणाम मुद्रा में ले आएँ।
#Step2    हस्तउत्तानासन Hasta uttanasan 

श्वास भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए ऊपर की ओर तानें जितना हो सकें तथा भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। जिससे छाती और पेट आगे की तरफ निकलता हैं स्वास अन्दर की तरफ खीचें।
  
#Step3    पद हस्तासनाःPdaa hastasana. 
तीसरी स्थिति में श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकाएं। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं पृथ्वी का स्पर्श करे दोनों हाथों को पदों के समीप जमीन पर रखे। घुटने सीधे रहें। माथा घुटनों को स्पर्श करता हुआ  हो।  कमर एवं रीढ़ से परेशान व्यक्ति इसे  न करें।

#Step 4.अश्वसंचालनासनः Ahswasanhchalnasana
इसी स्थिति में श्वास को भरते हुए दाहिने पैर को पीछे की ओर ले जाएं।   बायां पैर दोनों हथेलियो के बीच मे हो  छाती को    आगे की ओर तानें। गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस स्थिति में कुछ समय रुकें।

#Step 5 दडांसना Dandasana  


श्वास को धीरे-धीरे बाहर निष्कासित करते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। दोनों पैरों की एड़ियां परस्पर मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएं। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कण्ठकूप में लगाएं।

#Step 6. सांष्टाग नमस्कार Sastanga Namshkaar

श्वास भरते हुए शरीर को पृथ्वी के समानांतर, सीधा साष्टांग दण्डवत करें और पहले घुटने, छाती और माथा पृथ्वी पर लगा दें। नितम्बों को थोड़ा ऊपर उठा दें। श्वास छोड़ दें। 

#Step 7 भुजंगासनाः Bhujangasana 

इस स्थिति में धीरे-धीरे श्वास को भरते हुए छाती को आगे की ओर खींचते हुए हाथों को सीधे कर दें। गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं। घुटने पृथ्वी का स्पर्श करते हुए तथा पैरों के पंजे खड़े रहें।

#Step 8  पर्वतासनाः Parvatasana 

श्वास को धीरे-धीरे बाहर निष्कासित करते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। दोनों पैरों की एड़ियां परस्पर मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएं। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कण्ठकूप में लगाएं।

#Step 9  अश्वसंचालनासनःAhswasanhchalnasana


इसी स्थिति में श्वास को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं।  दाहिना पैर छाती को खींचकर आगे की ओर तानें। गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस स्थिति में कुछ समय रुकें। 

#Step 10  हस्तासनाःPdaa hastasana.  


तीसरी स्थिति में श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकाएं। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं पृथ्वी का स्पर्श करें। घुटने सीधे रहें। माथा घुटनों का स्पर्श करता हुआ हो ।

#Step 11  हस्तउत्तानासन Hasta uttanasan 

श्वास भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए ऊपर की ओर तानें तथा भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं।

#Step 12 प्राणामासनः pranamasana  

यह स्थिति - पहली स्थिति की भाँति रहेगी।


सूर्य नमस्कार के लाभ -  Benefits of Surya Namaskar

  • यह शरीर के सभी हिस्सों, मांसपेशियाँ और नसों को क्रियाशील करता है।
  • इसे करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, और कमर लचीली होती है।
  • सूर्य नमस्कार हृदय और फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाने में भी लाभदायक होता है।
  • सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से बालों का सफ़ेद होना और झरना बंद होता है।
  • इसका अभ्यास त्वचा के लिए भी फ़ायदेमंद है, इससे त्वचा के कई रोग दूर होते है।
  • सूर्य नमस्कार क्रोध को नियंत्रित करने में भी कारगर होता है, इससे शरीर का संतुलन बना रहता है, मन शांत रहता है, और आप पूरा दिन अच्छा महसूस करते है।
  • सूर्य नमस्कार‍र को हम खुले वातावरण में करते है, जिससे की शरीर को विटामिन-डी मिलता है और हड्डियाँ मजबूत होती हैं।
  • अगर आप रोज सूर्य़ नमस्कार करेंगे तो आपको पेट संबंधी हर समस्या जैसे कि कब्ज, एसिडिटी, पेय में जलन की समस्या से निजात मिल जाएगा।
  • यह शरीर की सभी महत्वपूर्ण ग्रंथियों, जैसे की पैंक्रियाज, थायरॉइड, पिट्यूटरी ग्लैंड आदि को संतुलित करने में सहायक है।
  • इसको नियमित तौर पर करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है। मानसिक तनाव, अवसाद, क्रोध, चिड़चिड़ापन, भय आदि के निदान के लिए इसे ज़रुर करना चाहिए।
  • सूर्य नमस्कार से पेट में होने वाली सभी समस्या भी जल्दी ठीक होने लगती है, पाचन क्रिया बढ़ाने के लिए भी यह उत्तम आसान है।
  • इसे रोज करने से रक्त संचालन सुचारू होता है, ब्लड प्रेशर की आशंका घटती है। मेटाबोलिज्म सुधरता है तथा शरीर के सभी अंग सशक्त और क्रियाशील होते हैं।
  • सूर्य नमस्कार वजन घटाने मे सहायक हैै। इससे ना केवल आपका वजन कम होता है, बल्कि यह आपके शरीर को पूरी तरह से शेप में भी लाता है।

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सूर्य नमस्कार करने मे सावधानियाँ  - 






  • योग कोई किसी भी प्रकार का आसन हमेशा खुले तथा स्वच्छ स्थान पर ही करना चाहिए।

    • सूर्य नमस्कार को ऐसे कभी न करें, की इसे करने से आपके शरीर के ऊपर कोई दबाव पड़े और आप इससे हाँफने लग जाएँ।
    • सूर्य नमस्कार की क्रिया को करते समय हर बार अपने पैरों को बारी-बारी से आपस में बदलते हुए प्रत्येक पैर पर एक के बाद एक करना चाहिए।
    • बुखार या जोड़ों मे दर्द हो तो सूर्य नमस्कार नही करना चाहिये 
    • Blood pressure ,Harniya, Heart disease,मेरूदण्ड से सम्बन्धित  बीमारियों मे सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिये।
    • मासिक धर्म के समय और गर्भवती होने के चार महीने बाद सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिये।


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