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कैसे करे रिश्तो को मजबूत और पाए अपनापन -- tips on relationship

रिश्ते और जिंदगी 

रिश्ते   एहसास, विश्वास और समझ से बना एक ऐसा शब्द जिससे हमारी पूरी जिन्दगी जुड़ी है।दुनिया मे हर इंसान किसी न किसी रिश्ते से जुड़ा है माँ ,बाप ,भाई ,बहन ,यार दोस्त ,पति ,पत्नी , lover और ऐसे न जाने कितने सब रिश्तों के ही अलग अलग नाम हैं।जिन्हें हम जीते है ।कहते है इंसान perfect हो या ना हो रिश्ता perfect होना चाहिए । इसलिए किसी भी relation को निभाने के लिए एक दूसरे को समझना पड़ता है।लेकिन जैसे जैसे हम बड़े होते जाते है वैसे वैसे हमारी   imperfections की वजह से इनमें दरार आने लगती हैं फिर miscommunication,misunderstanding,mind stress होने लगता हैं, हम दूसरे को अपने तरीकों से judge करने लगते हैं दूसरे के ऊपर अपना दबदबा बनाना चाहते हैं । जैसे ही हमारे अन्दर सिर्फ़ मैं सही हूँ यह विचार आने लगता है वैसे ही हमारे रिश्ते कमजोर होने लगते है। रिश्तों मे मैं का भाव नही बल्कि हम की feeling होनी चाहिए कोई भी सुख दुख हमारे अकेले का नहीं बल्कि हमारा होता हैं। 
समझे रिश्तो  की ज़रूरत  -   रिश्तों को मजबूत करने के लिए धन दौलत की जरूरत नही  होती बल्कि अपनेपन का एहसास और उस एहसास को जताने का सही तरीके की जरूरत होती हैं । अक्सर जो व्यक्ति हमारी बुराई करता है हमारी कमियों को बताता हैं उसे हम बुरा समझने लगते हैं जबकि एेसा नही होता वह इंसान तब तक बुरा नही हो सकता जब तक  उसके इरादे बुरे  न हो बल्कि वो तो हमारी कमियों को बताकर हमें उन्हें सुधारने का मौका देता हैं। ऐसा इंसान फिर कोई भी हो सकता है कोई घर का सदस्य ,कोई बाहर का व्यक्ति ,आपका कोई मित्र या रिश्तेदार।चापलूसी करने वाले से आलोचना करने वाले ज्यादा अच्छे होते हैं|

वह हमारे व्यक्तित्व को निखारने मे मददगार होता है। किसी के साथ हमारा behave भी तभी खराब होते है जब कोई हमारी expectation पर खरा नही उतरता। फिर वो हमारी नजर मे बुरा बन जाता है। किसी से कोई उम्मीद करने से ज्यादा अच्छा है कि हम अपना best देने की कोशिश करे रिश्तों को हम जितना बेहतर बना सकते हैं बनाने की कोशिश करें कुछ अपनी कहकर कुछ उनकी सुनकर सामने वाले के point of view को समझते हुए अपनी बात को कहने का तरीका ही किसी भी रिश्ते को मजबूत करता हैं। और ऐसा तभी हो सकता हैं जब हम अपनी communication skill को develop करें ।किसी भी चींज के positive और negative दो side होते है,हमें दोनों को ही समझना पड़ता है| 

समझे हर रिश्ते  को,अपनों  को दे समय  -- हर इंसान की जिन्दगी दो तरह के रिश्तों से घिरी होती हैं एक personal दूसरे  professional और दोनों ही हमारे लिए जरूरी हैं। Personal जिसमें love affection,emotion, अपनापन शामिल होता है वही दूसरी तरफ professional जो profit ,loss से जुड़ा होता हैं।रिश्ता कोई भी हो उसमें विश्वास उतना ही जरूरी है जितना खाने मे नमक ।किसी को धोखा देकर किसी का दिल दुखाकर हम कभी भी सफल या खुश नहीं हो सकते किसी के साथ गलत करने से पहले हमें  यह सोचना चाहिए की हम   ऐसा  क्यों कर रहे है और जब जमे अपने इस प्रश्न का उत्तर मिलेगा तो यकीन मानिए आप न तो कभी उसका बुरा सोचेगे ना ही कुछ बुरा करेंगे। क्योंकि कुछ गलत करने से ज्यादा जरूरी सही करना होता हैं। 
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हर रिश्ते की जरूरतें अलग अलग होती हैं । अक्सर लोगों की professional life की वजह से उनके personal life disturbs होने लगती है ऐसा उनके साथ होता है जो दोनों के बीच तालमेल नहीं बिठा पाते ऐसा नही है की किसी के पास 24 घंटे तो किसी के पास 48 घंटे हैं हम सभी के पास 24 घंटे ही होते हैं और इसी वक्त मे बिजी से बिजी लोग भी अपनी personal relation को इतना sweet और strong बना लेते है की उनके बीच गलतफहमी की कोई जगह नहीं बचती। 

   दुनिया में अक्सर  लोग टाइम न मिल पाने का बहाना बनाते है क्या वास्तव मे लोगों के पास इतना टाइम नही होता की वो अपने office या working hour से अपनों के लिए कुछ पल निकाल पाये। यदि हम अपने working hour से 1 या 2 मिनट निकालकर अपने मां - पापा अपने किसी खास से बात करे उनकी तबीयत और हाल चाल पुंछ ले या बीवी को फोन करके कहे I miss you ,अपने बच्चों के बारे  में पुछ ले  तो आप सोच भी नही सकते की आपकी ये care आपको अपनो के कितने करीब ले आएगी आपका रिश्ता कितना मजबूत हो जायेगा। यह सारी बातें  सिर्फ लड़कों के लिए नहीं है बल्कि लड़कियों पर भी बराबर लागू होती हैं। अब यदि बात professional relation की कि जाए तो यहाँ हमें दिल नहीं बल्कि दिमाग चलाने की जरूरत होती है यहाँ दिमाग चलाने का यह मतलब नही की किसी को cheat करना बल्कि अपने काम के प्रति ईमानदारी और अपने boss के लिए वफादारी होनी चाहिये साथ मे काम करने वालों के प्रति सहयोग की भावना हो न की ईर्ष्या की ।कहते है जिन्दगी मे ambitious होना अच्छा होता है यह हमे आगे बढ़ने कीप्रेरणा देता हैं लेकिन जब यही ambitions लालच का   
                                                                    
रूप ले लेती है तो हमारे जिंदगी और रिश्तों दोनों मे जहर घुलने लगता हैं हमें कही भी सुकून नहीं मिलता  लोग गलत राह पर चल पड़ते है ।जिससे न सिर्फ हमारी हमारी छवि खराब होती है बल्कि हमारे रिश्ते भी खराब होने लगते है।ऐसे मे किसी अपने का साथ, दोस्तों की मदद सहयोगियों का सहयोग बहुत मददगार साबित होता है फिर से हमारी जिन्दगी मे खुशियाँ भरने के लिए ,रिश्ते को फिर से नई ताजगी देने के लिए।वास्तव में जो   रिश्तों को निभाने का हूनर जानता है असल जिन्दगी मे वहीं सफल हैं।



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