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How to build a good relationship with parents-माता पिता जीवन का आधार

Relationship between parents and adulthood


किसी भी इंसान की जिंदगी मे माता- पिता का दर्जा ईश्वर से ऊपर माना गया हैं ।माँ - बाप हमारे जीवन का आधार होते हैं एक जमीन तो दूसरा आसमान, दोनों का महत्व बराबर हैं। माँ जीवन की शुरूआत हैं तो पिता उसका सहारा ।किसी भी इंसान का पहला रिश्ता उसकी माँ के साथ जुड़ता हैं जब वह अपनी माँ के गर्भ मे आता हैं तभी से माँ भावनात्मक रूप से उससे जुड़ जाती हैं उसके जन्म का इंतजार करने लगती हैं ।जिस दिन से उसे पता चलता हैं कि वह माँ बनने वाली हैं उसी दिन से वह अपने बच्चे को प्रेम और स्नेह करने लगती हैं यह होना natural हैं वह चाहकर भी इस feeling को कम नहीं कर सकती ।माँ की तरह ही पिता भी अपने बच्चे को प्यार करने लगता हैं और बेसब्री से उसके आने का इंतजार करता है उसके जन्म से पहले ही पूरा घर खिलौनों से भर देता हैं।उसके भविष्य के लिए सपने बुनता हैं।माँ-बाप हमारे जिंदगी का वो रिश्ता हैं जिसके न होने पर बच्चे को अनाथ कहा जाता हैं और इस अनाथ शब्द की पीड़ा वही समझ सकता हैं जो अपना जीवन बिना माता - पिता के जी रहा हैं ,जिसने बिना माँ - बाप के जिंदगी जी  हो। माता-पिता की  पूरी जिंदगी बच्चों की देखभाल मे गुजर जाती हैं । वो तो उसकी खुशी मे खुश हो जाते हैं और उसको तकलीफ या परेशानी मे देखकर दुखी  हो जाते हैं। पिता हमें अच्छी शिक्षा देने और हमारी जरूरतों को पूरा करने के लिए दिन रात मेहनत करता माँ हमारे खाने पीने पहनने जूते चप्पल से लेकर कपड़े  तक हर चीज़ का ख्याल करती हैं । माँ - बाप अपने बच्चों को कभी बोझ नहीं समझते। यदि हमारे पास हजारों रिश्ते हो तब भी कोई माँ - बाप की कमी पूरी नहीं कर सकता लेकिन यदि हमारे माता - पिता हमारे साथ हैं तो  हमें किसी और रिश्ते की जरूरत नहीं पड़ती ।दुनिया मे जिन बच्चों के  माँ -बाप  नही होते उनके लिए कोई उनका सगा  नहीं होता सारे रिश्तेदार नातेदार सिर्फ नाम के होते हैं । एक बच्चे का अच्छा - बुरा माता - पिता से ज्यादा और कोई नही सोच सकता ।

love your parents 


problem and solution -  आज के बदलते परिवेश भागती दौडती जिन्दगी मे लोगों को सिर्फ अपनी - अपनी पड़ी हैं किसी के पास इतना समय नहीं  कि वो किसी और का हालचाल पूूूँछ सके ।कुछ के पास तो समय नहीं है और कुुछ  पूछना नहीं  चाहते ऐसे लोगोंं को सििर्फ अपने आप से मतलब होता हैैं । लोगों के सोचने काा तरीका इतना बदल चुुका हैं कि लोग भावनात्मक  रूप से दूूर हो रहे हैैं ।  एक इंसान की life मे ढेरों समस्याए होती है financial ,social physical,mental,etc.लेकिन इन सब मे सबसे बड़ी  problem relationship की होती हैं ।क्योंकि किसी भी problem को solve करने के लिए आपका मानसिक रूप से strong रहना बहुत जरूरी हैं और इसमें हमारे अपनो का साथ उनका प्यार खास कर माता - पिता का साथ की बहुत बड़ी भूमिका होती हैं। लेकिन आजकल की generation माँ - बाप को सिर्फ अपनी जरूरत पूरी करने का जरिया समझते हैं जो time to time उनकी हर demand पूरी करते हैं। उनकी importance सिर्फ एक time period तक ही हर गई हैं जब तक बच्चा  बड़ा होकर self-depend नही बन जाता। जब तक किसी को माँ -बाप की जरूरत रहती है तब तक उनसे बहुत लगाव और प्यार रहता हैं अपनापन रहता हैं लेकिन जब वो हमारी जरूरतों को पूरा करने मे असमर्थ होते तो उनके लिए हमारे प्यार का मीटर down  हो जाता हैं । यह बात सभी के लिए सही नही हैं  बल्कि उनके लिए है जो ऐसा करते हैं या कर रहें हैं। जो माता - पिता अपना पूरा जीवन अपने बच्चे के लिए न्यौछावर कर देते हैं आज वही माँ - बाप उपेक्षा और तिरस्कार के पात्र बनकर रह गए हैं।यह आधुनिक समाज की एक गंभीर समस्या हैं  प्रत्येक 10 मे से 6 माता पिता इस उपेक्षा का सामना कर रहे हैं।खासकर यह problem metro cities मे ज्यादा देखने को मिलती हैं  वहाँ ज्यादातर nuclear family होने के कारण लोग अपने ही माँ - बाप को बोझ समझते हैं । बुढ़ापा life की वह stage जहाँ हमारा व्यक्ति का स्वास्थ्य धीरे धीरे गिरने लगता हैं लोगों के साथ उठना बैठना कम हो जाता हैं friend circle खत्म हो जाता हैं और पूरा तरह से अपने बच्चों के ऊपर depend हो जाते हैं बिल्कुल किसी बच्चे की तरह । यहीं बात आज की generation को समझनी होगी जिस तरह उनके बचपन से लेकर बड़े होने तक जिन मां बाप ने उनकी देखभाल की उन्हें पढ़ा लिखाकर इस काबिल बनाया की वो अपनी जिंदगी खुशी - खुशी जी सके ठीक वैसे ही उन्हें भी उनके बुढ़ापे मे care  और अपनेपन की जरूरत हैं 
किसी भी problem को solve करने के लिए उस problem की वजह को जानना और समझना बहुत जरूरी होता हैं  फिर समस्या चाहे जैसी भी हो । वर्तमान समय में घट रहें मानवीय और नैतिक गुणों को बचाने के लिए  उन कारणों को ढूँढना होगा जो इसके लिए जिम्मेदार हैं  जिससे इनको solve करना आसान हो जाएगा  -

1)आजकल की generation बहुत ज्यादा selfcenter होती जा रही हैं जिसके कारण वह अपने माता - पिता के प्रति अपनी moral duty और responsibility को नहीं निभाना चाहती । ज्यादातर लोगों को माँ बाप का रोकना टोकना उनके कामों मे interfere करना पसंद नहीं होता वे अपनी life  पूरी freedom  के साथ जीना चाहते ऐसे मे माँ -बाप  की नसीहते भी उन्हें बधनं लगती हैं ।उन्हें लगता हैं की वे बड़े हो गए हैं उन्हें किसी  को advice की जरूरत नहीं हैं। और समय के साथ हो रहे इन बदलावो को देखते हुए माँ - बाप को भी अपने बच्चो को freedom देनी चाहिए उनकी हर चीज़ पर निगरानी करना उनको बात बात पर टोकना कम करना चाहिए अपने पालन पोषण पर भरोसा करिये खुद को समय के साथ बदलिये बच्चों के साथ कदम मिलाकर चलीये इससे आप हमेशा उनके करीब रहेंगे।

2)  माता - पिता को neglect करने की एक वजह घर परिवार मे हो रहे सास बहू के झगड़े ।अक्सर ऐसा देखने और सुनने मे आता हैं कि लोग बड़ी खुशी के साथ  बेटे की शादी करते हैं और बहू के घर मे आने के कुछ समय बाद ही घर मे झगड़े शुरू हो जाते हैं।  बहू सास के मन मुताबिक काम नही करती तो बहू का अपने पति का हर वक्त माँ बाप की हुजूरी करना पसंद नहीं। वहीं माता पिता को  लगता हैं कि शादी के बाद बेटा बदल गया हैं वो अपनी बीवी का बहुत ख्याल रखता हैं और उनको avoidकरता हैं  इन परिस्थितियों में बेटा माँ बाप से अलग रहने को मजबूर हो जाता हैं जिससे. झगड़े को खत्म किया जा  सके और धीरे धीरे उसका लगाव कम होने लगता है उसका  परिवार बीवी .और बच्चों तक. सीमित हो जाता हैं। लेकिन ऐसी समस्या का समाधान सिर्फ मा बाप से अलग होना तो नही हो सकता यदि सास बहू को बेटी की तरह  समझे उसे उसकी गलतियों पर समझाए  डाटकर  नही प्यार से ,उसकी खुशियों और जरूरतों का ख्याल रखे इससे बहू के मन मे भी अपने सास ससुर के लिए सम्मान और अपनेपन की भावना पैदा होगी वो उनसे emotionally attach हो पाएँगी। जिससे परिवार के झगड़े कम होंगे या नहीं होंगे।

3) यदि morality और. Emotions की बात छोड़ दी. जा ये तो लोगों के पास  कोई  वजह नहीं हैं जिसके लिए उनके साथ रहा जाए या उनको अपने साथ रखा जाये ।बचपन से लेकर बड़े होने तक माँ - बाप हर वक्त हमारे साथ रहते हैं और जब लोग  self-depend बन जाते हैं तो उनकी जरूरत महसूस नहीं होती  वे सिर्फ उनके लिए बोझ बन कर रह जाते हैं। हम कभी यह नहीं सोचते कि यदि बचपन मे माँ  - बाप ने हमें बोझ समझा होता तो क्या आज हमारा आपका  हम सब का अस्तित्व होता । हमें अच्छी शिक्षा नहीं दी होती तो हमारी life कितनी बेकार होतीं। हम कितने ही Morden और advance क्यों न हो  जाए आज  भी चोट लगने पर  सबसे पहली याद मां की ही आती हैं। फिर उसी माँ बाप के लिए लोग अपनी responsibility कैसे भुल जाते हैं ? माता पिता के बुढ़ापे का सहारा बनना उनकी देखभाल करना  हमारा नैतिक कर्तव्य हैं । इसके लिए बच्चों का माता पिता से भावनात्मक तौर पर जुड़ना जरूरी हैं। और माता - पिता को बच्चों की परवरिश के साथ साथ  अपने बुढ़ापे के लिए कुछ बचाना चाहिये ।बुढ़ापे को  secure. करीये उनको एहसास  होना चाहिये की आप आर्थिक और मानसिक रूप से मजबूत है। बच्चों को खुद से जुड़े रहने की एक वजह दीजिए चाहे .वह emotionally या  financially ही क्यों  न हो।
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अपनों का दे सहारा और अपनापन 

4) आधुनिक जीवन शैली और लोगों के busy schedule की वजह से लोगों के पास एक दूसरे से बात करने का time नही है ।घर से office और office से घर बस यही तक जिन्दगी सिमट कर रह गई हैं जिसकी वजह से हमारा अपने परिवार के सदस्यों से communication कम या ना के बराबर हो गया हैं सिर्फ जरूरत के वक्त ।बात करने का यह मतलब नही की काम छोड़कर दिनभर गप्पें लडाते रहे बल्कि बातचीत से मतलब हैं एक दूसरे के साथ quality time expend करना ,healthy conversation करना जो किसी भी रिश्ते को मजबूत करने के लिए बहुत जरूरी हैं इससे लोगों के बीच के मनमुटाव और गलतफहमीयां दूर होगी एक कहावत है "शीशा गलती से और रिश्ते गलतफहमी से टूटते हैं ।" इसीलिए रिश्तों के दुराव को कम करने के लिए communication बहुत जरूरी हैं। कभी कभी बीवी और बच्चों के साथ साथ  माता - पिता को भी घुमाने  ले जाइए उनकी पसंद का खाना खिलााइए् उनके साथ मौज मस्ती करीये , उनसे बाते करिए उनकी ज़रूरतों का ध्यान रखिये।

5) Morden society मे nuclear family का चलन बढता जा रहा हैं। कोई अपनी job की .वजह से तो कोई अपनी मर्जी से  nuclear family मे रहना ज्यादा पसंद करते हैं  । ऐसा परिवार जिसमे पति पत्नी  बच्चे सम्मिलित है उसमे grandfather या grandmother के लिए जगह नही होतीं । कितने तो उनको old age houses या वृद्धा आश्रम मे भेज देते हैं ।  उनके लिए बच्चों के साथ साथ माँ बाप की सेवा करना उनकी देखभाल करना possible नही हो पाता । family  nuclear हो या joint family उसमे बूढ़े माँ -बाप की जगह हर हाल में होनी चाहिए बच्चो के साथ साथ उनकी केयर भी होनी चाहिए। घर के बड़े बुजुर्गों से हमें बहुत कुछ सिखने को मिलता है हमारे बच्चों के संस्कारो और उनके  पालन पोषण को मजबूती मिलती।  nuclear family में अक्सर पति पत्नी दोनों ही जॉब करते हैं ऐसे में वे अपने बच्चों  को नौकरानी के भरोसे छोड़ कर जाते है जिससे बच्चे unsecure  रहते हैं ऐसे में यदि घर में बूढ़े माँ -बाप हो तो बच्चे के साथ साथ माता पिता भी खुद  को safe महसूस करेंगे। 

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